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नसों में सूजन का इलाज सिरà¥à¤« 10 मिनट में ही, à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥€à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ की à¤à¥€ जरूरत नहीं पड़ती
वेरिकोजवेनà¥à¤¸ यानी नसों में सूजन जिसे आमतौर पर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक इसका इलाज कराया जाठतो यह गंà¤à¥€à¤° रूप धारण कर सकती है। इसके लिठदेश में पहली गà¥à¤²à¥‚ कà¥à¤²à¥‹à¤œà¤° तकनीक से इसका मोहाली में इलाज शà¥à¤°à¥‚ हो गया है। फोरà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में इस आधà¥à¤¨à¤¿à¤• तकनीक से शà¥à¤°à¥‚ किया गया इलाज इतना सरल है कि मातà¥à¤° पांच मिनट में सरà¥à¤œà¤°à¥€ हो जाती है। यहां तक à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥€à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ की à¤à¥€ जरूरत नहीं पड़ती। à¤à¤• सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤² कैथेटर रोगी की नस में लगाया जाता है और नस को à¤à¤• विशेष टरà¥à¤•िश गà¥à¤²à¥‚ के साथ अलग किया जाता है। डायरेकà¥à¤Ÿà¤°, वेसà¥à¤•à¥à¤²à¤° सरà¥à¤œà¤°à¥€ और तà¥à¤°à¥à¤•ी से आठगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤² आरडी डॉ. मरà¥à¤Ÿà¥‡à¤¸, पà¥à¤°à¥‹à¤•à¥à¤Ÿà¤° ने अनूठी तकनीक के बारे में बताया
वैरिकोज वेनà¥à¤¸, शरीर के किसी à¤à¥€ हिसà¥à¤¸à¥‡ में हो सकता है लेकिन यह विशेषकर पैरों में देखा जाता है। इसकी बाहरी दिखावट से अलग इसके चलते होने वाला दरà¥à¤¦ बढ़ता जाता है और नसों का गलना शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है। परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ उस समय दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• हो जाती हैं जब टांगों में à¤à¤¾à¤°à¥€à¤ªà¤¨ या जलन महसूस होने लगती है, उनमें धड़कन महसूस होती है, मांसपेशियों में à¤à¤‚ठन और टांगों के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में सूजन होने लगती है। लंबे समय तक बैठे या खड़े होने के बाद किसी को à¤à¥€ à¤à¤¯à¤‚कर दरà¥à¤¦ का सामना करना पड़ता है। नई गà¥à¤²à¥‚ कà¥à¤²à¥‹à¤œà¤° उपचार में à¤à¤• पेटेंटà¥à¤¡ वेनाबà¥à¤²à¥‰à¤• कैथेटर का उपयोग किया जाता है जो कि à¤à¤• नई à¤à¤‚डोवेसà¥à¤•à¥à¤²à¤° तकनीक है जिससे वेनà¥à¤à¤¸ रीफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ रोग का इलाज किया जा सकता है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में मैकिनोको कैमिकल à¤à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤à¤¶à¤¨ ऑफ वैरिकोज वेनà¥à¤¸ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ डॉ. रावà¥à¤² जिंदल ने की है जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤• बार फिर से à¤à¤¾à¤°à¤¤ में इस नई और बेहद दरà¥à¤¦ रहित तकनीक को सबसे पहले पेश किया है।
यह है लकà¥à¤·à¥à¤£... इसरोग के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को आम तौर पर टांगों में खà¥à¤œà¤²à¥€ और à¤à¤¾à¤°à¥€à¤ªà¤¨, टखनों में सूजन, तà¥à¤µà¤šà¤¾ के नीचे नीले रंग की नीली धमनियां दिखना, लाली, खà¥à¤¶à¥à¤• और तà¥à¤µà¤šà¤¾ की खà¥à¤œà¤²à¥€ आदि हैं। कà¥à¤› लोगों में, टखने से ऊपर की तà¥à¤µà¤šà¤¾ सिकà¥à¤¡à¤¼ सकती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसके नीचे वसा काफी सखà¥à¤¤ हो जाती है। इसके अनà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में सफेद आना, अनियमित निशान-जैसे पैच आदि शामिल होते हैं जो टखनों पर दिखाई दे सकते हैं या मरीज को गंà¤à¥€à¤° और ठीक ना होने वाले अलà¥à¤¸à¤° à¤à¥€ हो सकते हैं। डॉ जिंदल ने बताया कि इलाज के बाद à¤à¥€, रोगी को कà¥à¤› दवाà¤à¤‚ लेनी पड़ती हैं और उपचार के बाद विशेष खà¥à¤¯à¤¾à¤² à¤à¥€ रखना होता है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि गà¥à¤²à¥‚ पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€à¤œà¤° को बिना लोकल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥€à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ के किया जाता है और इससे कोई निशान à¤à¥€ नहीं पड़ता है। इसमें तो कोई कट लगता है और ना कोई सà¥à¤Ÿà¤¿à¤šà¥‡à¤œ (टांके) आदि लगाठजाते हैं। उपचार के 24 घंटे के à¤à¥€à¤¤à¤° मरीज को छà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥€ दे दी जाती है।
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